अगदं वो<चस्तु भद्रं वो द्रष्टास्मि पुनरागतान् । आपरद्धर्मार्थकृच्छेषु सर्वकार्येषु वा पुन:,तुम्हें कभी कोई रोग न हो, सदा मंगल-ही-मंगल दिखायी दे। कुशलपूर्वक वनसे लौटनेपर मैं फिर तुम्हें देखूँगा। युधिष्ठिर! आपत्तिकालमें, धर्म तथा अर्थका संकट उपस्थित होनेपर अथवा सभी कार्योंमें समय-समयपर अपने उचित कर्तव्यका पालन करना। कुन्तीनन्दन! भारत! तुमसे आवश्यक बातें कर लीं। तुम्हें कल्याण प्राप्त हो
agadaṁ vo 'stu bhadraṁ vo draṣṭāsmi punarāgatān | āpaddharma-artha-kṛcchreṣu sarvakāryeṣu vā punaḥ ||
বিদুর বললেন— তোমাদের কখনও রোগ না হোক; তোমাদের সর্বদা মঙ্গল হোক। তোমরা আবার ফিরে এলে আমি তোমাদের পুনরায় দেখব। বিপদের সময়ে, যখন ধর্ম ও অর্থের দাবি কঠিন ও সংঘর্ষপূর্ণ হয়ে ওঠে, এবং তেমনি সকল কাজে বারংবার—নিজের যথার্থ কর্তব্য অনুসারেই আচরণ করবে।
विदुर उवाच