दुशासन उवाच रजस्वला वा भव याज्ञसेनि एकाम्बरा वाप्यथवा विवस्त्रा । द्यूते जिता चासि कृतासि दासी दासीषु वासश्न॒ यथोपजोषम्,दुःशासन बोला--द्रौपदी! तू रजस्वला, एकवस्त्रा अथवा नंगी ही क्यों न हो, हमने तुझे जूएमें जीता है; अतः तू हमारी दासी हो चुकी है, इसलिये अब तुझे हमारी इच्छाके अनुसार दासियोंमें रहना पड़ेगा
দুঃশাসন বলল—“যাজ্ঞসেনী! তুমি রজঃস্বলা হও, একবস্ত্রা হও কিংবা বিবস্ত্রাই হও; তুমি পাশায় জিত হয়েছ এবং দাসী করা হয়েছ। অতএব দাসীদের মধ্যে আমার ইচ্ছামতোই তোমাকে থাকতে হবে।”
दुशासन उवाच