Dhṛtarāṣṭra’s Counsel on Restraint and the Pāṇḍavas’ Authorized Return (धृतराष्ट्र-उपदेशः)
शारदोत्पलपत्राक्ष्या शारदोत्पलगन्धया । शारदोत्पलसेविन्या रूपेण श्रीसमानया,उसके नेत्र शरद्ू-ऋतुके प्रफुल्ल कमलदलके समान सुन्दर एवं विशाल हैं। उसके शरीरसे शारदीय कमलके समान सुगन्ध फैलती रहती है। वह शरद्-ऋतुके कमलोंका सेवन करती है तथा रूपमें साक्षात् लक्ष्मीके समान है
śāradotpalapatrākṣyā śāradotpalagandhayā | śāradotpalasevinyā rūpeṇa śrīsamanayā ||
তার চোখ শরৎকালের প্রস্ফুটিত পদ্মপত্রের মতো বিস্তৃত ও মনোহর; তার দেহ থেকে শরৎ-পদ্মের মতো সুগন্ধ ছড়ায়; সে শরৎ-কমলে রমণ করে, আর রূপে সে যেন স্বয়ং শ্রী (লক্ষ্মী)-সমা।
युधिछिर उवाच