अध्याय ६४ — सभामध्ये क्रोध-निवारणम्
Restraint of wrath in the royal assembly
न श्रेयसे नीयते मन्दबुद्धि: स्त्री श्रोत्रियस्थेव गृहे प्रदुष्टा । ध्रुवं न रोचेद् भरतर्षभस्य पति: कुमार्या इव षष्टिवर्ष:,जैसे श्रोत्रियके घरमें दुराचारिणी स्त्री कल्याणमय अग्निहोत्र आदि कार्योंमें नहीं लगायी जा सकती, उसी प्रकार मन्दबुद्धि पुरुषको कल्याणके मार्गपर नहीं लगाया जा सकता। जैसे कुमारी कन्याको साठ वर्षका बूढ़ा पति नहीं पसंद आ सकता, उसी प्रकार भरतवंशशिरोमणि दुर्योधनको निश्चय ही मेरा उपदेश रुचिकर नहीं प्रतीत होता
যেমন শ्रोত্রিয় ব্রাহ্মণের গৃহে দুষ্কর্মপরায়ণা স্ত্রীকে কল্যাণকর অগ্নিহোত্রাদি কর্মে নিয়োজিত করা যায় না, তেমনি মন্দবুদ্ধি পুরুষকে শ্রেয়ের পথে চালিত করা যায় না। আর যেমন কুমারী কন্যার কাছে ষাট বছরের বৃদ্ধ স্বামী রুচিকর নয়, তেমনি ভরতশ্রেষ্ঠ দুর্যোধনের কাছে আমার উপদেশ নিশ্চয়ই মনোরম বলে প্রতীয়মান হয় না।
विदुर उवाच