अद्रोहसमयं कृत्वा चिच्छेद नमुचे: शिर: । शक्र: साभिमता तस्य रिपौ वृत्ति: सनातनी,इन्द्रने नमुचिसे कभी वैर न करनेकी प्रतिज्ञा करके उसपर विश्वास जमाया और मौका देखकर उसका सिर काट लिया। तात! शत्रुके प्रति इसी प्रकारका व्यवहार सदासे होता चला आया है। यह इन्द्रको भी मान्य है
adrohasamayaṃ kṛtvā ciccheda namuceḥ śiraḥ | śakraḥ sābhimatā tasya ripau vṛttiḥ sanātanī ||
দুর্যোধন বলল—“অদ্রোহের চুক্তি করে শক্র (ইন্দ্র) নমুচির বিশ্বাস অর্জন করেছিল, তারপর সুযোগ পেয়ে তার মস্তক ছিন্ন করেছিল। তাত! শত্রুর প্রতি এমন আচরণ প্রাচীনকাল থেকেই চলে আসছে; ইন্দ্রও তা অনুমোদন করে।”
दुर्योधन उवाच