Adhyāya 52 (Sabhā-parva): Vidura Invites Yudhiṣṭhira to Hastināpura for the Dice Match
फलमूलाशना ये च किराताश्चर्मवासस: । क्रूरशस्त्रा: क्रूरकृतस्तांश्व पश्याम्यहं प्रभो,पिताजी! मैंने देखा कि जो राजा हिमालयके परार्धभागमें निवास करते हैं, जो उदयगिरिके निवासी हैं, जो समुद्र-तटवर्ती कारूषदेशमें रहते हैं तथा जो लौहित्यपर्वतके दोनों ओर वास करते हैं, फल और मूल ही जिनका भोजन है, वे चर्मवस्त्रधारी क्रूरतापूर्वक शस्त्र चलानेवाले और क्रूरकर्मा किरातनरेश भी वहाँ भेंट लेकर आये थे
phalamūlāśanā ye ca kirātāś carmavāsasaḥ | krūraśastrāḥ krūrakṛtas tāṃś ca paśyāmy ahaṃ prabho pitāji ||
পিতা, প্রভু! ফল-মূলভোজী, চর্মবস্ত্রধারী, নিষ্ঠুর অস্ত্রধারী ও কঠোর কর্মে রত সেই কিরাতদেরও আমি এখানে দেখছি।
दुर्योधन उवाच