Adhyāya 52 (Sabhā-parva): Vidura Invites Yudhiṣṭhira to Hastināpura for the Dice Match
किरात, दरद, दर्व, शूर, यमक, औदुम्बर, दुर्विभाग, पारद, बाह्लिक, काश्मीर, कुमार, घोरक, हंसकायन, शिबि, त्रिगर्त, यौधेय, भद्र, केकय, अम्बष्ठ, कौकुर, तार्क्ष्य, वस्त्रप, पह्चवव, वशातल, मौलेय, क्षुद्रक, मालव, शौण्डिक, कुक्कुर, शक, अंग, वंग, पुण्ड्र, शाणवत्य तथा गय--ये उत्तम कुलनमें उत्पन्न श्रेष्ठ एवं शस्त्रधारी क्षत्रिय राजकुमार सैकड़ोंकी संख्यामें पंक्तिबद्ध खड़े होकर अजातशत्रु युधिष्ठिरको बहुत धन अर्पित कर रहे थे || १३-- १७ || वज्भा: कलिड्डरा मगधास्ताग्रलिप्ता: सपुण्ड्रका: । दौवालिका: सागरका: पत्रोर्णा: शैशवास्तथा,भारत! वंग, कलिंग, मगध, ताग्रलिप्त, पुण्ड्रक, दौवालिक, सागरक, पत्रोर्ण, शैशव तथा कर्णप्रावरण आदि बहुत-से क्षत्रियनरेश वहाँ दरवाजेपर खड़े थे तथा राजाज्ञासे द्वारपालगण उन सबको यह संदेश देते थे कि आपलोग अपने लिये समय निश्चित कर लें। फिर उत्तम भेंट-सामग्री अर्पित करें। इसके बाद आपलोगोंको भीतर जानेका मार्ग मिल सकेगा
vaṅgāḥ kaliṅgāḥ magadhās tāmrali(pt)āḥ sapuṇḍrakāḥ | daivālikāḥ sāgarakāḥ patrornāḥ śaiśavās tathā ||
দুর্যোধন বলল—হে ভারত! বঙ্গ, কলিঙ্গ, মগধ, তাম্রলিপ্ত ও পুণ্ড্র; সঙ্গে দैবালিক, সাগরক, পত্রোর্ণ ও শৈশব—এ সকলের নৃপতিরা দ্বারে দাঁড়িয়ে ছিল।
दुर्योधन उवाच