Nāradasya Rājadharma-praśnāḥ
Nārada’s Examination of Royal Ethics
कच्चिदर्थान् विनिश्चित्य लघुमूलान् महोदयान् । क्षिप्रमारभसे कर्तु न विघ्नयसि तादृशान्,धनकी वृद्धिके ऐसे उपायोंका निश्चय करके, जिनमें मूलधन तो कम लगाना पड़ता हो, किंतु वृद्धि अधिक होती हो, उनका शीघ्रतापूर्वक आरम्भ कर देते हो न? वैसे कार्योंमें अथवा वैसा कार्य करनेवाले लोगोंके मार्गमें तुम विघ्न तो नहीं डालते?
kaccid arthān viniścitya laghu-mūlān mahodayān | kṣipram ārabhase kartuṁ na vighnayasi tādṛśān ||
নারদ বললেন— অল্প মূলধনে মহালাভ হয়—এমন উদ্যোগগুলি বিচার করে স্থির করে কি তুমি দ্রুত আরম্ভ করো? এবং এমন উদ্যোগ বা তা সম্পাদনকারীদের পথে কি তুমি বাধা দাও না তো?
नारद उवाच