अर्जुनस्य दिग्विजयारम्भः — Arjuna Initiates the Northern Campaign and Secures Bhagadattta’s Tribute
तयोरयुद्ध॑ ततो द्रष्ट॑ समेता: पुरवासिन: । ब्राह्मणा वणिजल्चैव क्षत्रियाश्षन सहस्रश:,जनमेजय! उस समय उनका मल्लयुद्ध देखनेके लिये हजारों पुरवासी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, स्त्रियाँ एवं वृद्ध इकट्ठे हो गये। मनुष्योंकी अपार भीड़से वह स्थान ठसाठस भर गया
জনমেজয়! তখন তাঁদের মল্লযুদ্ধ দেখতে নগরবাসী সহস্র সহস্র লোক—ব্রাহ্মণ, ক্ষত্রিয়, বৈশ্য, শূদ্র, নারী ও বৃদ্ধ—একত্র হল। মানুষের অপরিসীম জনসমুদ্রে সেই স্থান গিজগিজ করে ভরে উঠল।
श्रीकृष्ण उवाच