Jarāsandha-nipātana, rāja-mokṣa, and rājasūya-sāhāyya-prārthanā
Jarāsandha’s fall, liberation of kings, and request for support
जरासंध उवाच नाजितान् वै नरपतीनहमाददि कांश्वन । अजित: पर्यवस्थाता को<त्र यो न मया जित:,जरासंधने कहा--श्रीकृष्ण! मैं युद्धमें जीते बिना किन्हीं राजाओंको कैद करके यहाँ नहीं लाता हूँ। यहाँ कौन ऐसा शत्रु राजा है, जो दूसरोंसे अजेय होनेपर भी मेरेद्वारा जीत न लिया गया हो?
জরাসন্ধ বলল—শ্রীকৃষ্ণ! যুদ্ধে জয় না করে আমি কোনো রাজাকে বন্দি করে এখানে আনি না। এখানে এমন কোন শত্রু রাজা আছে, যে অন্যদের কাছে অজেয় হয়েও আমার দ্বারা জিত হয়নি?
जरासंध उवाच