अध्याय १: महाप्रस्थानारम्भः
The Commencement of the Great Departure
न चैनमशकत वज्षिन्निवर्तस्वेति भाषितुम् । उन छहोंको साथ लेकर सातवें राजा युधिष्ठिर जब हस्तिनापुरसे बाहर निकले तब नगरनिवासी प्रजा और अन्तःपुरकी स्त्रियाँ उन्हें बहुत दूरतक पहुँचाने गयीं; किंतु कोई भी मनुष्य राजा युधिष्ठिससे यह नहीं कह सका कि आप लौट चलिये
আর কেউই তাঁকে বলতে পারল না—“ফিরে আসুন।” সেই ছয়জনকে সঙ্গে নিয়ে সপ্তম রাজা যুধিষ্ঠির যখন হস্তিনাপুর থেকে বেরিয়ে গেলেন, তখন নগরবাসী প্রজা ও অন্তঃপুরের নারীরা তাঁকে বহু দূর পর্যন্ত এগিয়ে দিতে গেল; কিন্তু কোনো মানুষই রাজা যুধিষ্ঠিরকে বলতে সক্ষম হল না—“আপনি প্রত্যাবর্তন করুন।”
वैशम्पायन उवाच