हते तु कर्णे विदिशो5पि जज्वलु- स्तमोवृता द्यौर्विचचाल भूमि: । पपात चोल्का ज्वलनप्रकाशा निशाचराश्षाप्यभवन् प्रह्श:,कर्णके मारे जानेपर दिशाओंके कोने-कोनेमें आग-सी लग गयी, आकाशमें अँधेरा छा गया, धरती डोलने लगी, अग्निके समान प्रकाशमान उल्का गिरने लगी और निशाचर प्रसन्न हो गये
hate tu karṇe vidiśo 'pi jajvaluḥ tamovṛtā dyaur vicacāla bhūmiḥ | papāta colkā jvalanaprakāśā niśācarāś cāpy abhavan prahṛṣṭāḥ ||
শল্য বললেন—কর্ণ নিহত হতেই দিগন্তের কোণাগুলোও যেন জ্বলে উঠল; আকাশ অন্ধকারে আচ্ছন্ন হল এবং পৃথিবী কেঁপে উঠল। অগ্নির মতো দীপ্ত উল্কা পতিত হল, আর নিশাচররাও উল্লসিত হয়ে উঠল।
शल्य उवाच