उदीर्णाश्वगजा सेना सर्वक्षत्रस्य भारत । त्वां समासाद्य निधनं गता भीम॑ च भारत,“भारत! गोवास, दासमीय, वसाति, प्राच्य, वाट्धान और भोजदेशनिवासी अभिमानी वीरोंकी तथा सम्पूर्ण क्षत्रियोंकी सेना, जिसमें उद्ण्ड घोड़ों और उन्मत्त हाथियोंकी संख्या अधिक थी, तुम्हारे और भीमसेनके पास पहुँचकर नष्ट हो गयी
sañjaya uvāca |
udīrṇāśvagajā senā sarvakṣatrasya bhārata |
tvāṁ samāsādya nidhanaṁ gatā bhīmaṁ ca bhārata ||
সঞ্জয় বললেন—হে ভারত! সমগ্র ক্ষত্রিয়বর্গের সেই সেনা—উন্মত্ত অশ্ব ও মহাগজে পরিপূর্ণ—তোমার ও ভীমের সম্মুখে এসে ধ্বংসপ্রাপ্ত হল।
संजय उवाच