मेरोर्दिग्वर्णनम् / Digvarṇana of Meru: Uttara-Kuru, Bhadrāśva, and Jambūdvīpa Motifs
अष्टचक्रं हि तद् यान॑ भूतयुक्तं मनोजवम् | अग्निवर्ण महातेजो जाम्बूनदविभूषितम्,क्षीरसागरके उत्तर तटपर भगवान् विष्णु निवास करते हैं, वे वहाँ सुवर्णमय रथपर विराजमान हैं। उस रथमें आठ पहिये लगे हैं। उसका वेग मनके समान है। वह समस्त भूतोंसे युक्त, अग्निके समान कान्तिमान्ू, परम तेजस्वी तथा जाम्बूनद नामक सुवर्णसे विभूषित है
aṣṭacakraṃ hi tad yānaṃ bhūtayuktaṃ manojavam | agnivarṇaṃ mahātejo jāmbūnadavibhūṣitam ||
সে রথটি সত্যই অষ্টচক্রবিশিষ্ট, আশ্চর্য ভूतগণে যুক্ত এবং মনোর মতো বেগবান। তা অগ্নিবর্ণ, মহাতেজস্বী এবং জাম্বূনদ স্বর্ণে বিভূষিত।
संजय उवाच