मेरोर्दिग्वर्णनम् / Digvarṇana of Meru: Uttara-Kuru, Bhadrāśva, and Jambūdvīpa Motifs
चन्द्रमाश्न॒ सनक्षत्रो ज्योतिर्भूत इवावृत: । पद्मप्रभा: पद्मवर्णा: पद्मपत्रनिभेक्षणा:,नक्षत्रोंसहित चन्द्रमा वहाँ ज्योतिर्मय होकर सब ओर व्याप्त-सा रहता है। वहाँके मनुष्य कमलकी-सी कान्ति तथा वर्णवाले होते हैं। उनके विशाल नेत्र कमलदलके समान सुशोभित होते हैं
নক্ষত্রসমেত চন্দ্র সেখানে যেন জ্যোতির্ময় হয়ে সর্বত্র পরিব্যাপ্ত থাকে। সেখানকার মানুষ পদ্মের মতো দীপ্তি ও পদ্মবর্ণ; তাদের নয়ন পদ্মপত্রের ন্যায় সুন্দর।
संजय उवाच