Chapter 19: Prativyūha of the Pāṇḍavas — Vajra (Acala) Formation and Dawn Omens
तमर्कमिव दुष्प्रेक्ष्य तपनन्तमिव वाहिनीम् । न शेकुः सर्वयोधास्ते प्रतिवीक्षितुमन्तिके,उस समय सूर्यकी भाँति उनकी ओर देखना कठिन हो रहा था। वे आपकी सेनाको संतप्त-सी कर रहे थे। निकट आनेपर समस्त योद्धा उनकी ओर आँख उठाकर देखनेमें भी समर्थ न हो सके
tam arkam iva duṣprekṣya tapanantam iva vāhinīm | na śekuḥ sarvayodhās te prativīkṣitum antike ||
তারা সূর্যের মতোই দৃষ্টিতে অসহ্য, আর তোমার সেনাকে যেন দগ্ধ করছিল। কাছে এসে গেলে সেই সব যোদ্ধার কেউই তাদের দিকে চোখ তুলে সামনাসামনি তাকাতে পারল না।
संजय उवाच