Bhīṣma’s Fall, the Arrow-bed (śara-talpa), and the Establishment of Guard
को हि नेच्छेत् प्रियं पुत्रं जीवन्तं शाश्वती: समा: । क्षत्रधर्म तु सम्प्रेक्ष्य ततस्त्वां नियुनज्म्यहम्,“अपना प्यारा पुत्र नित्य-निरन्तर जीवित रहे, यह कौन नहीं चाहता है तथापि क्षत्रिय- धर्मपर दृष्टि रखकर मैं तुम्हें इस कार्यमें नियुक्त कर रहा हूँ
কে-ই বা চায় না যে তার প্রিয় পুত্র চিরকাল জীবিত থাকুক? তবু ক্ষত্রধর্মকে সামনে রেখে, তাই আমি তোমাকে এই কার্যে নিয়োজিত করছি।
संजय उवाच