Brahmā’s Instruction on Brahmacarya, Vānaprastha, and the Aliṅga Path
Ethics of Non-attachment
एवं युक्तो जयेल्लोकान् वानप्रस्थो जितेन्द्रिय: । न संसरति जातीषु परमं स्थानमाश्रित:,इसी प्रकार आगे बतलाये जानेवाले उत्तम गुणोंसे युक्त जितेन्द्रिय वानप्रस्थी पुरुष भी उत्तम लोकोंपर विजय पाता है। वह उत्तम स्थानको पाकर फिर इस संसारमें जन्म धारण नहीं करता
এইরূপ উত্তম গুণে যুক্ত, ইন্দ্রিয়জয়ী বানপ্রস্থও শ্রেষ্ঠ লোকসমূহ লাভ করে। পরম স্থান আশ্রয় করে সে আর জন্মজন্মান্তরে জাতিসমূহে ঘুরে বেড়ায় না।
वायुदेव उवाच