धर्मनिन्दा–धर्मोपासनाफलम् तथा साध्वाचारलक्षणम्
Fruits of Disparaging vs. Observing Dharma; Marks of Good Conduct
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३७६ श्लोक मिलाकर कुल ९६६ “लोक हैं) #स्निमलज (2) आज मनना त्रिचत्वारिशर्दाधिकशततमो< ध्याय: ब्राह्मणादि वर्णोकी प्राप्तिमें ४ २४३३५३ कर्मोंकी प्रधानताका उमोवाच भगवन् भगनेत्रघ्न पूष्णो दन्तनिपातन । दक्षक्रतुहर त्रयक्ष संशयो मे महानयम्
umovāca—bhagavan bhaganetraghna pūṣṇo dantanipātana | dakṣakratu-hara tryakṣa saṁśayo me mahān ayam ||
উমা বললেন—হে ভগবান! ভগের চক্ষু বিনষ্টকারী, পূষার দন্ত ভেঙে দানকারী, দক্ষযজ্ঞ-ধ্বংসকারী ত্রিনয়ন! আমার মনে এক মহা সংশয় উদিত হয়েছে।
श्रीमहेश्वर उवाच