Vānaprastha-dharma and Tapas: Śiva–Umā Saṃvāda
Forest-Stage Discipline and Austerity
पितृभक्तस्तु यो विप्रो वरलब्धो महायशा: । परन्तु वे भी इस प्रकार पितृकार्यके रहस्यको निश्चित रूपसे नहीं जानते हैं। जो पिताके भक्त हैं और जिन महायशस्वी ब्राह्मणको वर प्राप्त हुआ है
পিতৃভক্ত, বরপ্রাপ্ত ও মহাযশস্বী যে ব্রাহ্মণগণ— তাঁরাও পিতৃকার্যের রহস্য নিশ্চিতভাবে জানেন না। সর্বশ্রেষ্ঠ চিরঞ্জীব মহাত্মা মার্কণ্ডেয়কে বাদ দিয়ে আর কারও কাছে তার তত্ত্ব জানা নেই।
देवदूत उवाच