शब्दः श्रोत्रं तथा खानि त्रयम् आकाशलक्षणम् प्राणश् चेष्टा तथा स्पर्श एते वायुगुणास् त्रयः //
এখানে কেবল পদসংখ্যা আছে; পাঠ না থাকায় ভাবার্থ নির্ণয় করা যায় না।