व्यास उवाच प्रकृत्यास् तु विकारा ये क्षेत्रज्ञास् ते परिश्रुताः ते चैनं न प्रजानन्ति न जानाति स तान् अपि //
এটি ব্রহ্মপুরাণ (আদি পুরাণ)-এর ২৩৭ অধ্যায়ের ২১তম শ্লোক; মূল শ্লোকটি এখানে অনুপস্থিত।