अदैन्यम् अनुदीर्णत्वम् अनुद्वेगो ह्य् अवस्थितिः एष मार्गो हि मोक्षस्य प्रसन्नो विमलः शुचिः तथा वाक्कायमनसां नियमाः कामतो ऽव्ययाः //
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