तत् सर्वं विस्तराद् ब्रह्मन् वक्तुम् अर्हसि सांप्रतम् श्रोतुम् इच्छामहे पुण्यां कथां चातिमनोहराम् //
এটি ব্রহ্মপুরাণের চুয়ান্নতম শ্লোক; মূল পাঠ এখানে উপস্থাপিত নয়, তাই এটি কেবল ইঙ্গিতমূলক অনুবাদ।