धृतराष्ट्र–संजय संवादः
Dhṛtarāṣṭra and Sañjaya on Arjuna’s Indraloka report and the political consequences
सुसूक्ष्मेणोत्तरीयेण मेघवर्णेन राजता । तनुरभ्रावृता व्योम्नि चन्द्रलेखेव गच्छति,जाती हुई उस विलासिनी अप्सराकी आकृति अनेक आश्चर्योंसे भरे हुए स्वर्गलोकमें भी सिद्ध, चारण और गन्धर्वोके लिये देखनेके ही योग्य हो रही थी। अत्यन्त महीन मेघके समान श्याम रंगकी सुन्दर ओढ़नी ओडढ़े तन्वंगी उर्वशी आकाशमें बादलोंसे ढकी हुई चन्द्रलेखा-सी चली जा रही थी
susūkṣmeṇottarīyeṇa meghavarṇena rājatā | tanur abhrāvṛtā vyomni candralekheva gacchati ||
অতি সূক্ষ্ম, মেঘবৰ্ণ অথচ দীপ্তিমান উত্তৰীয় পিন্ধি, তাইৰ তনু দেহ আকাশত—মেঘে আৱৃত চন্দ্ৰৰেখাৰ দৰে—আগবাঢ়ি গৈছিল।
वैशम्पायन उवाच