Mātali’s Proposal for Guṇakeśī and Sumukha’s Audience with Indra
कण्व उवाच मातलिं प्रीतमनसं दृष्टवा सुमुखदर्शनात् | निवेदयामास तदा माहात्म्यं जन्म कर्म च,कण्व मुनि कहते हैं--राजन्! मातलिको सुमुखके दर्शनसे प्रसन्नचित्त देखकर नारदजीने उस समय उस नागकुमारके जन्म, कर्म और महत्त्वका परिचय देना आरम्भ किया
kaṇva uvāca mātaliṁ prītamanasaṁ dṛṣṭvā sumukhadarśanāt | nivedayāmāsa tadā māhātmyaṁ janma karma ca ||
কণ্বে ক’লে—সুমুখক দেখি মাতলি প্ৰীতমন হোৱা দেখি, তেতিয়া নাৰদে সেই নাগকুমাৰৰ জন্ম, কৰ্ম আৰু মাহাত্ম্য বৰ্ণনা কৰিবলৈ আৰম্ভ কৰিলে।
कण्व उवाच