Bṛhaspati’s Counsel on Contentment
Santoṣa), Restraint, and Adroha (Non-injury
अन्ये साम प्रशंसन्ति व्यायाममपरे जना: | नैकं॑ न चापरं केचिदुभयं च तथापरे,कुछ लोग साम (प्रेमपूर्ण बर्ताव) की प्रशंसा करते हैं और कोई व्यायाम (यत्न और परिश्रम) के गुण गाते हैं। कोई इन दोनोंमेंसे एक (साम) की प्रशंसा नहीं करते हैं तो कोई दूसरे (व्यायाम) की, तथा कुछ लोग दोनोंकी ही बड़ी प्रशंसा करते हैं
anye sāma praśaṃsanti vyāyāmam apare janāḥ | naikaṃ na cāparaṃ kecid ubhayaṃ ca tathāpare ||
কিছুমানে সাম—মৃদু, স্নেহপূৰ্ণ আৰু মীমাংসামূলক আচৰণ—ৰ প্ৰশংসা কৰে; আন কিছুমানে ব্যায়াম—যত্ন, পৰিশ্ৰম আৰু উদ্যম—ক মহিমান্বিত কৰে। কিছুমানে একোটাকো মানে নে, আনোটাকো নহয়; আৰু কিছুমানে দুয়োটাক একেলগে শ্ৰেষ্ঠ বুলি প্ৰশংসা কৰে।
देवस्थान उवाच