वार्तिकांश्षाब्रवीद् राजा पुत्रस्ते सत्यविक्रम:,पृष्ठतोडनुगमिष्यामि सार्थहीनो यथाध्वग: । इसके बाद आपके सत्यपराक्रमी पुत्र राजा दुर्योधनने संदेशवाहक दूतोंसे इस प्रकार कहा-- 'भीमसेनने रणभूमिमें अधर्मसे मेरा वध किया है। अब मैं स्वर्गमें गये हुए द्रोणाचार्य, कर्ण, शल्य, महापराक्रमी वृषसेन, सुबलपुत्र शकुनि, महाबली जलसन्ध, राजा भगदत्त, महाधनुर्धर सोमदत्त, सिंधुराज जयद्रथ, अपने ही समान पराक्रमी दुःशासन आदि बन्धुगण, विक्रमशाली दुःशासनकुमार और अपने पुत्र लक्ष्मण--इन सबके तथा और भी जो बहुत-से मेरे पक्षके सहस्रों योद्धा मारे गये हैं, उन सबके पीछे मैं स्वर्ग जाऊँगा। मेरी दशा उस पथिकके समान है, जो अपने साथियोंसे बिछुड़ गया हो
sañjaya uvāca |
vārtikāṁś cābravīd rājā putras te satyavikramaḥ |
pṛṣṭhato 'nugamiṣyāmi sārthahīno yathādhvagaḥ ||
সঞ্জয়ে ক’লে—তেতিয়া আপোনাৰ সত্যপৰাক্ৰমী পুত্ৰ ৰজাই ক’লে—“সাৰ্থ হেৰুৱা পথিকৰ দৰে মই তেওঁলোকৰ পিছফালে অনুসৰণ কৰিম।”
संजय उवाच