Bhīṣma-nipāta-saṃvāda — Sañjaya’s Report of Bhīṣma’s Fall (भीष्मनिपातसंवादः)
परासक्ते च वस्तस्मिन् कथमासीन्मनस्तदा । जैसे ग्वालेके बिना गौओंका समुदाय इधर-उधर भटकता फिरता है, उसी प्रकार अब मेरी सेना उदभ्रान्त हो रही होगी। महान् युद्धके समय जिनमें सम्पूर्ण जगत्का परम पुरुषार्थ प्रकट दिखायी देता था, वे ही भीष्म जब परलोकके पथिक हो गये? उस समय तुम लोगोंके मनकी अवस्था कैसी हुई थी || ५४ ह ।। जीविते>प्यद्य सामर्थ्य किमिवास्मासु संजय,संजय! आज जीवित रहनेपर भी हमलोगोंमें क्या सामर्थ्य है? जगत्के विख्यात धर्मात्मा महापराक्रमी पिता भीष्मको युद्धमें मरवाकर हम उसी प्रकार शोकमें डूब गये हैं, जैसे पार जानेकी इच्छावाले पथिक नावको अगाध जलनमें डूबी हुई देखकर दुःखी होते हैं
jīvite 'py adya sāmarthyaṃ kim ivāsmāsu sañjaya |
ধৃতৰাষ্ট্ৰ ক’লে— “ভীষ্ম সেই অৱস্থালৈ গ’লত তোমালোকৰ মন কেনেকুৱা হৈছিল? সঞ্জয়, আজি জীয়াই থাকিলেও আমাৰ সামৰ্থ্যই বা কি? জগতখ্যাত ধৰ্মাত্মা, মহাপৰাক্ৰমী পিতা ভীষ্মক যুদ্ধত মৰিবলৈ দি আমি শোকত ডুব গৈছোঁ—যেন পাৰ হ’বলৈ ইচ্ছুক পথিকসকলে অতল জ’লত ডুবি যোৱা নাও দেখি বিষণ্ণ হয়।”
धृतराष्ट उवाच