तेडभिवाद्य ततो भीष्म॑ कृत्वा च त्रि: प्रदक्षिणम् । विधाय रक्षां भीष्मस्य सर्व एव समन्ततः,राजन्! आपके पितृतुल्य भीष्मको उपर्युक्त तकिया देकर उन नरेश, पाण्डव तथा महारथी कौरव सभीने एक साथ सुन्दर बाणशय्यापर सोये हुए महात्मा भीष्मके पास जाकर उन्हें प्रणाम करके उनकी तीन बार प्रदक्षिणा की और सब ओरसे भीष्मकी रक्षाकी व्यवस्था करके सभी वीर अपने शिविरको ही चल दिये। वे अत्यन्त आतुर होकर भीष्मका ही चिन्तन कर रहे थे। सायंकालमें खूनसे लथपथ हुए वे सब लोग अपने निवासस्थानपर गये
te 'bhivādya tato bhīṣmaṁ kṛtvā ca triḥ pradakṣiṇam | vidhāya rakṣāṁ bhīṣmasya sarva eva samantataḥ ||
তাৰপিছত সকলোৱে ভীষ্মক প্ৰণাম কৰি তিনিবাৰ প্ৰদক্ষিণা কৰিলে আৰু চাৰিওফালে ভীষ্মৰ ৰক্ষাৰ ব্যৱস্থা কৰিলে। বাণশয্যাত শয়ন কৰা পিতামহক যথোচিত সন্মান জনাই তেওঁলোকে নিজ নিজ শিবিৰলৈ উভতি গ’ল—অন্তৰে ব্যাকুল, ভীষ্মকেই চিন্তা কৰি। সন্ধিয়াবেলা ৰক্তে লেপেটা হৈ তেওঁলোকে নিজৰ নিবাসস্থানত উপস্থিত হ’ল।
संजय उवाच