भीष्मस्य जलप्रार्थना — अर्जुनस्य पर्जन्यास्त्रप्रयोगः — दुर्योधनं प्रति सन्ध्युपदेशः
Bhīṣma’s request for water; Arjuna’s Parjanya-astra; counsel to Duryodhana on reconciliation
दुर्मर्षणस्तु विंशत्या पाण्डवं निशितै: शरै: । फिर सिन्धुराज जयद्रथने तीन, अवन्तीके विन्द और अनुविन्दने पाँच-पाँच तथा दुर्मर्षणने बीस तीखे बाणोंद्वारा पाण्डुनन्दन भीमसेनको चोट पहुँचायी
durmarṣaṇas tu viṃśatyā pāṇḍavaṃ niśitaiḥ śaraiḥ |
তেতিয়া দুৰ্মর্ষণে বিশটা তীক্ষ্ণ শৰৰে পাণ্ডুনন্দন মহাবলী ভীমসেনক বিদ্ধ কৰিলে।
संजय उवाच