Hiḍimba’s Approach and Hiḍimbā’s Warning to Bhīmasena (हिडिम्बागमनम् / हिडिम्बा-भयवचनम्)
प्रहरिष्यन् प्रियं ब्रूयात् प्रहरन्नपि भारत । प्रहृत्य च कृपायीत शोचेत च रुदेत च,मनमें क्रोध भरा हो, तो भी ऊपरसे क्रोधशून्य बना रहे और मुसकराकर बातचीत करे। कभी क्रोधमें आकर किसी दूसरेका तिरस्कार न करे। भारत! शत्रुपर प्रहार करनेसे पहले और प्रहार करते समय भी उससे मीठे वचन ही बोले। शत्रुको मारकर भी उसके प्रति दया दिखाये, उसके लिये शोक करे तथा रोये और आँसू बहाये
praharīṣyan priyaṃ brūyāt praharann api bhārata | prahṛtya ca kṛpāyīta śocet ca rudet ca ||
হে ভাৰত! আঘাত কৰিবলৈ উদ্যত হলেও আৰু আঘাত কৰি থাকিলেও মধুৰ বাক্যেই ক’ব। আঘাত কৰাৰ পিছতো দয়া দেখুৱাব—তেওঁৰ বাবে শোক কৰি কান্দিব।
कणिक उवाच