Ādi Parva, Adhyāya 103 — Dhṛtarāṣṭra–Gāndhārī Vivāha: Proposal, Consent, and the Vow
ववृषु: शरवर्षेण वर्षेणेवाद्रिमम्बुदा: । स तं बाणमयं वर्ष शरैरावार्य सर्वतः,राजन! उन नरेशोंने भीष्मजीपर एक ही साथ दस हजार बाण चलाये; परंतु भीष्मजीने उन सबको अपने ऊपर आनेसे पहले बीचमें ही विशाल पंखयुक्त बाणोंकी बौछार करके शीघ्रतापूर्वक काट गिराया। तब वे सब राजा उन्हें चारों ओरसे घेरकर उनके ऊपर उसी प्रकार बाणोंकी झड़ी लगाने लगे, जैसे बादल पर्वतपर पानीकी धारा बरसाते हैं। भीष्मजीने सब ओरसे उस बाण-वर्षाको रोककर उन सभी राजाओंको तीन-तीन बाणोंसे घायल कर दिया। तब उनमेंसे प्रत्येकने भीष्मजीको पाँच-पाँच बाण मारे
vavṛṣuḥ śaravarṣeṇa varṣeṇevādrim ambudāḥ | sa taṃ bāṇamayaṃ varṣaṃ śarair āvārya sarvataḥ, rājan |
বৈশম্পায়ন ক’লে—সেই ৰজাসকলে শৰবৃষ্টি কৰিলে, যেন মেঘে পৰ্বতৰ ওপৰত জলধাৰা বৰষায়। কিন্তু ৰাজন, ভীষ্মে নিজৰ শৰেৰে চাৰিওফালে সেই বাণময় বৰষা ৰোধ কৰিলে; লাগিবলৈ আগতেই মাজতে প্ৰতিহত কৰি পেলালে, আৰু ঘেৰাও হৈয়ো আক্রমণ থামাই ৰাখিলে।
वैशम्पायन उवाच