विविक्तशीलाय विधिप्रियाय विवादहीनाय बहुश्रुताय विनीतवेशाय नहैतुकात्मने सदैव गुह्यं त्व् इदम् एव देयम्
ইয়াত শ্লোক-সংখ্যা ৩৫; মূল শ্লোক নথকাৰণে যথাযথ অনুবাদ সম্ভৱ নহয়।