अध्याय ५०: उत्तरेण सह अर्जुनस्य रथप्रयाणे ध्वजचिह्नैः कौरवसेनानिर्देशः
Arjuna directs Uttara by identifying Kaurava commanders through banners
पुत्रादनन्तरं शिष्य इति धर्मविदो विदु: । एतेनापि निमित्तेन प्रियो द्रोणस्य पाण्डव:,धर्मज्ञ पुरुष ऐसा मानते हैं कि गुरुको पुत्रके बाद शिष्य ही प्रिय होता है, इस कारणसे भी पाण्डुनन्दन अर्जुन आचार्य द्रोणको प्रिय हैं [अतः वे उनकी प्रशंसा क्यों न करें?]
putrād anantaraṁ śiṣya iti dharmavido viduḥ | etena api nimittena priyo droṇasya pāṇḍavaḥ ||
قال كِرِبا: «إن العارفين بالدارما يرون أن بعد الابن يأتي التلميذُ أعزَّ الناس. ولهذا السبب أيضًا كان الباندَفي (أرجونا) محبوبًا لدى درونا؛ ومن ثمّ فمن اللائق أن يثني عليه درونا.»
कृप उवाच