Śamī-vṛkṣe śastra-nidhāna and Entry into Virāṭa’s Capital (शमीवृक्षे शस्त्रनिधानम्)
पाज्चालान् येन संग्रामे भीमसेनो5जयत् प्रभु: । प्रत्यषेधद् बहूनेक: सपत्नांश्वैव दिग्जये,भीमसेनने जिसके द्वारा पांचाल वीरोंपर विजय पायी थी, दिग्विजयके समय उन्होंने अकेले ही जिसकी सहायतासे बहुतेरे शत्रुओंको परास्त किया था, वज्रके फटने और पर्वतके विदीर्ण होनेके समान जिसका भयंकर टंकार सुनकर कितने ही शत्रु युद्ध छोड़कर भाग खड़े हुए तथा जिसके सहयोगसे उन्होंने सिन्धुराज जयद्रथको परास्त किया था, अपने उसी धनुषकी प्रत्यंचा भीमसेनने भी उतार दिया
vaiśampāyana uvāca |
pāñcālān yena saṅgrāme bhīmaseno 'jayat prabhuḥ |
pratyaṣedhad bahūn ekaḥ sapatnāṃś caiva digjaye ||
قال فَيْشَمْبايَنَة: وبذلك السلاح (القوس) كان بهيماسينا الجبّار قد غلب البانشالا في القتال، وفي حملة الفتح إلى الجهات كان قد ردّ وحده خصومًا كثيرين؛ وها هو بهيماسينا الآن ينزع وترَه، إشارةً إلى وضع الاستعداد للمعركة جانبًا عن قصدٍ، وكبحِ القوة لا إطلاقِها.
वैशम्पायन उवाच