धृतराष्ट्र–संजय संवादः
Dhṛtarāṣṭra and Sañjaya on Arjuna’s Indraloka report and the political consequences
उर्वश्युवाच अनावृताश्च सर्वा: सम देवराजाभिनन्दन । गुरुस्थाने न मां वीर नियोक्तुं त्वमिहाहसि,उर्वशीने कहा--वीर देवराजनन्दन! हम सब अप्सराएँ स्वर्गवासियोंके लिये अनावृत हैं --हमारा किसीके साथ कोई पर्दा नहीं है। अतः तुम मुझे गुरुजनके स्थानपर नियुक्त न करो
قالت أورفشي: «أيها البطل، يا ابنَ ملكِ الآلهةِ المحبوب! إنّا نحنُ الأبساراتِ جميعًا مكشوفاتٌ لأهلِ السماء—لا حجابَ بيننا وبين أحد. فإذًا، أيها الشجاع، لا يليق بك أن تُقيمَني هنا في مقامِ المُعلِّمِ المُبجَّل.»
वैशम्पायन उवाच