ततो देवा मानवा दानवाश्न निकृन्तन्तं कर्णमात्मानमेवम् । दृष्टवा सर्वे सिंहनादान् प्रणेदु- न हास्यासीन्मुखजो वै विकार:,उस समय देवता, मनुष्य और दानव सब लोग इस प्रकार अपना शरीर काटते हुए कर्णको देखकर सिंहनाद करने लगे; परंतु कर्णके मुखपर तनिक भी विकार नहीं आया
حينئذٍ رأى الآلهةُ والبشرُ والدَّانَفَةُ جميعًا كَرْنَةَ وهو يقطع جسده على تلك الهيئة، فدوَّوا بزئيرٍ كزئير الأسد؛ غير أنّ وجه كَرْنَةَ لم يبدُ عليه أدنى تغيّر.
वैशम्पायन उवाच