रामस्य सुग्रीवप्रति रोषः — हनूमता सीतादर्शनवृत्तान्तः
Rāma’s Reproach of Sugrīva; Hanūmān’s Report of Seeing Sītā
अथवा तुम धाता, विधाता, सविता, विभु या इन्द्रके भवनसे यहाँ आयी हो? न तो तुम्हीं हमारा परिचय पूछती हो और न हम ही यहाँ तुम्हारे पतिके विषयमें जानते हैं ।। वयं हि मान॑ तव वर्धयन्त: पृच्छाम भद्रे प्रभवं प्रभुं च । आचक्ष्व बन्धूंक्ष पतिं कुलं च तत्त्वेन यच्चेह करोषि कार्यम्
«أم جئتِ من قصرِ دهاطر أو فيدهاطر أو سافِتر أو فيبهو أو من قصرِ إندرا؟ أنتِ لا تسألين عن هويتنا، ونحن أيضًا لا نعلم هنا شيئًا عن زوجك. لذلك، أيتها السيدة الفاضلة، وإجلالًا لمقامك، نسألك عن منشئك وعن سيّدك. فاذكري على الحقيقة أقرباءكِ وزوجكِ ونسبكِ، وما العمل الذي تقومين به في هذا الموضع.»
कोटिक उवाच