वनप्रस्थानम् (Departure for the Forest) — Āraṇyaka-parva, Adhyāya 24
ततः स यानादवरुह्यु राजा सभ्रातृक: सजन: काननं तत् । विवेश धर्मात्मवतां वरिष्ठ- स्त्रिविष्टपं शक्र इवामितौजा:,तदनन्तर धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ एवं अमित तेजस्वी राजा युधिष्ठिरने अपने सेवकों और भाइयोंसहित रथसे उतरकर स्वर्ममें इन्द्रके समान उस वनमें प्रवेश किया
ثم نزل الملك عن مركبته، ومعه إخوته وحاشيته، ودخل تلك الغابة. وكان يودهيشثيرا—أرفعَ أهل الدَّرْمَا وأعظمَهم بأسًا ونورًا—يدخلها كدخول شَكْرَة (إندرا) إلى السماء.
वैशम्पायन उवाच