Adhyāya 208: Aṅgirasī-kanyāḥ
Enumeration of Aṅgiras’ daughters and attribute-names
ततो जगाम मिथिलां जनकेन सुरक्षिताम् | धर्मसेतुसमाकीर्णा यज्ञोत्सववर्ती शुभाम्,वह अनेकानेक जंगलों, गाँवों तथा नगरोंको पार करता हुआ राजा जनकके द्वारा सुरक्षित, धर्मकी मर्यादासे व्याप्त तथा यज्ञसम्बन्धी उत्सवोंसे सुशोभित सुन्दर मिथिलापुरीमें जा पहुँचा
ثم بلغ مِثيلا، المحروسة بالملك جاناكا—مدينة مباركة، عامرة بسدود الدارما، قائمة على احتفالات اليَجْنَة.
मार्कण्डेय उवाच