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Shloka 29

Adhyāya 188: Mārkaṇḍeya’s Account of Yuga-Decline and the Restoration Motif

Kali-yuga to Kalki

सम्प्रक्षालनकालो<यं लोकानां समुपस्थित: । तस्मात्‌ त्वां बोधयाम्यद्य यत्‌ ते हितमनुत्तमम्‌,“यह सब लोकोंके सम्प्रजक्ञालन (एकार्णवके जलसे धुलकर नष्ट होने)-का समय आ गया है। इसलिये मैं आपको सचेत करता हूँ और आपके लिये जो परम उत्तम हितकी बात है, उसे बताता हूँ

«لقد حضر زمانُ الغَسل الجارف للعوالم. فلذلك أُنَبِّهُكَ اليوم وأُخبرُكَ بما هو لك خيرٌ أعلى وأتمّ.»

मार्कण्डेय उवाच