Gandhamādana-praveśa and Vṛṣaparvan-āśrama
Entry toward Gandhamādana; hospitality and onward route
तस्या मामनवद्याड्या धर्मपत्न्या: प्रिये स्थितम् पुष्पाहारमिह प्राप्त निबोधत निशाचरा:,निशाचरो! तुम्हें मालूम होना चाहिये कि मैं उसी अनिन््द्य सुन्दरी धर्मपत्नीका प्रिय मनोरथ पूर्ण करनेके लिये उद्यत हो बहुत-से सौगन्धिक पुष्पोंका अपहरण करनेके लिये ही यहाँ आया हूँ
«يا أهلَ الليل (نيشاتشارا)، اعلموا: إنما جئتُ إلى هنا لأُتمِّم المرادَ المحبوب لزوجتي على نهج الدharma (dharmapatnī)، تلك الطاهرةَ الكريمةَ التي لا عيب فيها، بأن أجلب لها كثيرًا من أزهار السَوْغَنْدِهِيكا.»
भीम उवाच