Ṛśyaśṛṅga’s Luring, Rainfall at Aṅga, and Reconciliation with Vibhāṇḍaka (ऋश्यशृङ्गोपाख्यानम्)
ततो राजन् काश्यपस्यैकपुत्र प्रवेश्य योगेन विमुच्य नावम् । प्रमोदयन्त्यो विविधैरुपायै- राजग्मुरज्राधिपते: समीपम्,राजन! तदनन्तर विभाण्डक मुनिके इकलौते पुत्रको युक्तिसे नावमें ले जाकर वेश्याने नाव खोल दी। फिर सभी युवतियाँ भाँति-भाँतिके उपायोंद्वारा उनका मनोरंजन करती हुई अंगराजके समीप आयीं
ثمّ، أيّها الملك، إنّ تلك البغيّ احتالت فأدخلت ابن فيبهانْدَكا الوحيد إلى السفينة وفكّت رباطها. ثم أخذت الفتيات يُطربنه بشتّى الحيل، حتى بلغن به إلى حضرة ملك أَنْغا.
विभाण्डक उवाच