अग्राह्य-ज्ञातिसंबन्धमण्डल-विवेचनम् / Managing Unreadable Kinship Networks: Vāsudeva–Nārada on Cohesion
बशभ्रूग्रसेनयो राज्यं नाप्तुं शक्यं कथंचन । ज्ञातिभेदभयात् कृष्ण त्वया चापि विशेषत:,श्रीकृष्ण! अक्रूर और उमग्रसेनके अधिकारमें गये हुए राज्यको भाई-बन्धुओंमें फूट पड़नेके भयसे अन्यकी तो कौन कहे इतने शक्तिशाली होकर स्वयं भी आप किसी तरह वापस नहीं ले सकते
يا كريشنا، إنّ الملك الذي صار في يد أكرورا وأوغراسينا لا يمكن استرجاعه على أي وجه. وخوفًا من انقسام الأقارب وتصدّعهم، ليس غيرك وحده عاجزًا، بل إنك أنت أيضًا—على ما لك من قوةٍ خاصة—لا تستطيع أن تسترده.
नारद उवाच