Nāga-āyatana-darśana-pratīkṣā — The Brāhmaṇa’s Request and Waiting on the Gomatī
परिपप्रच्छ राजेन्द्र: पितामहपितामहम् । सूतपुत्रने कहा--शौनक! राजा जनमेजयका वह यज्ञ विधिपूर्वक चल रहा था। उसमें विभिन्न कर्मोके बीचमें अवकाश मिलनेपर राजेन्द्र जनममेजयने अपने पितामहोंके पितामह वेदनिधि भगवान् कृष्णद्वैपायन महर्षि व्याससे इस प्रकार पूछा
قال ابن السُّوتا: «يا شَوْنَكَ! كان يَجْنَ الملك جَنَمِجَيَة جارياً على وجهه وفق الأصول. وبين الأعمال المتعددة، حين سنحت فسحة، سأل الملكُ جَنَمِجَيَةُ المَهَرِشيَّ فياسا—كريشنا دْوَيْبَايَنَ، كنزَ الفيدا، وجدَّ الأجداد—على هذا النحو.»
शौनक उवाच