Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
ननु नाम त्वया मोक्ष: कृत्स्न: पठचशिखाच्छुत: । सोपाय: सोपनिषद: सोपासड्ग: सनिश्चय:,नरेश्वरर जब आपने महर्षि पंचशिखाचार्यसे उपाय (निदिध्यासन), उपनिषद् (उसके श्रवण-मनन), उपासंग (यम-नियम आदि योगाड़) और निश्चय (ब्रह्म और जीवात्माकी एकताका अनुभव)--इन सबके सहित सम्पूर्ण मोक्षशास्त्रका श्रवण किया है, आप आसत्तियोंसे मुक्त हो गये हैं और सम्पूर्ण बन्धनोंको काटकर खड़े हैं, तब आपकी छत्र- चवँर आदि विशेष-विशेष वस्तुओंमें आसक्ति कैसे हो रही है?
nanu nāma tvayā mokṣaḥ kṛtsnaḥ pañcaśikhāc chrutaḥ | sopāyaḥ sopaniṣadaḥ sopāsaṅgaḥ saniścayaḥ ||
قال بهيشما: «لا ريب أنك قد سمعتَ من الحكيم بَنْجَشِخا تعليمَ التحرّر كاملًا—مع وسائل الممارسة، وأساسه الأوبانيشدي، والرياضات المساندة، واليقين الراسخ المولود من التحقّق. فإذا كنتَ حقًّا قد تحرّرتَ من التعلّقات ووقفتَ كمن قطع كل القيود، فكيف يعود التعلّق فيك إلى شارات الملك الخاصة كالمظلّة الملكية والمراوح (الشَوْرِيّات)؟»
भीष्य उवाच