अव्यक्तकालमान-निर्णयः
Measures of Time from the Unmanifest; Creation, Elements, and the Primacy of Mind
साध्या ऊचु. केनायमावृतो लोक: केन वा न प्रकाशते । केन त्यजति मित्राणि केन स्वर्ग न गच्छति,साध्योंने पूछा--हंस! इस जगत्को किसने आवृत कर रक््खा है? किस कारणसे उसका स्वरूप प्रकाशित नहीं होता है? मनुष्य किस हेतुसे मित्रोंका त्याग करता है? और किस दोषसे वह स्वर्गमें नहीं जाने पाता?
sādhyā ūcuḥ | kenāyam āvṛto lokaḥ? kena vā na prakāśate? kena tyajati mitrāṇi? kena svargaṃ na gacchati? |
سأل السادهْيَة: «يا هَمْسَا، بماذا يُحجَب هذا العالم؟ وبأي سبب لا يسطع حقيقته؟ ولماذا يترك الإنسان أصدقاءه؟ وبأي ذنب لا يبلغ السماء؟»
हंस उवाच