अव्यक्त–प्रकृति–इन्द्रियविचारः
The Unmanifest, Prakṛtis, and the Sense-Complex
स्वयंकृतानि कर्माणि जातो जन्तु: प्रपद्यते । नाकृत्वा लभते कश्ित् किंचिदत्र प्रियाप्रियम्,जीव जगत्में जन्म लेकर अपने पूर्वकृत कर्मोका ही फल भोगता है; पूर्वजन्ममें कुछ किये बिना यहाँ कोई भी किसी इष्ट या अनिष्ट फलको नहीं पाता है
svayaṃkṛtāni karmāṇi jāto jantuḥ prapadyate | nākṛtvā labhate kaścit kiṃcid atra priyāpriyam ||
قال باراشارا: إنّ الكائن إذا وُلد لا بدّ أن يلقى عواقب الأفعال التي صنعها بنفسه. ومن غير عملٍ سابق لا ينال أحدٌ في هذا العالم ثمرةً هنا—لا محبوبةً ولا مكروهة.
पराशर उवाच