अव्यक्त–प्रकृति–इन्द्रियविचारः
The Unmanifest, Prakṛtis, and the Sense-Complex
विस्तरा: क्लेशसंयुक्ता: संक्षेपास्तु सुखावहा: । परार्थ विस्तरा: सर्वे त्यागमात्महितं विदु:,कर्मोका विस्तार क्लेशयुक्त होता है और संक्षेप सुखदायक है। सभी कर्म-विस्तार परार्थ हैं अर्थात् मन और इन्द्रियोंकी तृप्तिके लिये हैं; परंतु त्याग अपने लिये हितकर माना गया है
الإطناب مقرونٌ بالمشقة، أمّا الإيجاز فمجلِبٌ للراحة. وكلّ توسّعٍ في الأفعال إنما هو لغايةٍ خارجية—لإرضاء الذهن والحواس—غير أنّ التخلّي والزهد (تياغا) يعدّه الحكماء نافعًا للمرء في نفسه.
पराशर उवाच